जिस काम में वर्षों से लगे हैं वैज्ञानिक, कोरोना ने उसे झटके में कर दिखाया, जानें कैसे?  

नई दिल्ली. एन पी न्यूज 24 – कोरोना का कहर जारी है, लेकिन इस बीच जहरीली होती हवा साफ हो रही है। कई राष्ट्र इसका सपना देख रहे थे और अपने-अपने स्तर लड़ाई भी लड़ …

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नई दिल्ली. एन पी न्यूज 24 – कोरोना का कहर जारी है, लेकिन इस बीच जहरीली होती हवा साफ हो रही है। कई राष्ट्र इसका सपना देख रहे थे और अपने-अपने स्तर लड़ाई भी लड़ रहे थे। यूरोपियन स्पेश एजेंसी द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक कोरोना ने पलक झपकते ही वायु प्रदूषण को ठीक कर दिया है और यह सब क्वारंटाइन होने के वजह से हुआ है। सड़कों पर वाहन नहीं चल रहे हैं, कारखाने बंद हैं।नोवेल कोरोना वायरस (COVID-19) के फैलाव को रोकने के लिए दुनिया के कई देश अभूतपूर्व कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। ऐसा ही एक कदम है शहरों को पूरी तरह लॉक-डाउन करना। चीन और इटली को स्थिति के बेकाबू हो जाने के बाद ये अतिवादी रास्ता अपनाना पड़ा। ऐसा कोई निश्चित तरीका नहीं है, जिससे मानव गतिविधियों को सीमित किए जाने के असर को मापा जा सके, लेकिन इसके वातावरण पर प्रभाव को कुछ हद तक नापा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने एक निश्चित पैटर्न को पकड़ा है जो नाइट्रोजन डायऑक्साइड (NO2) के घटे हुए स्तर को दर्शाता है। पहले चीन और अब इटली में बड़े पैमाने पर लोगों को घरों में या अन्यत्र पृथक रखे जाने की वजह से यहां मानव गतिविधियां सीमित होने पर वातावरण में NO2 की कम मात्रा मापी गई। दरअसल नाइट्रोजन ऑक्साइड मानव संचालित गतिविधियों जैसे कि मोटर वाहन, ऊर्जा संयंत्र और औद्योगिक इकाइयों की वजह से वातावरण में उत्सर्जित होती है। नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) , दोनों का मानना है कि NO2 का स्तर घटना सीधे तौर पर इन क्षेत्रों में मशीनों से जुड़ी गतिविधियों का प्रभावी ढंग से कम होना है।

भारत की स्थिति : भारत ने भी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं. केंद्र और राज्य सरकारों ने इस संबंध में कई एडवाइजरी जारी की हैं। हर मुमकिन कोशिश की जा रही है कि वायरस के संक्रमण को कम से कम किया जा सके। अधिकतर राज्यों में स्कूल कॉलेज, सिनेमा हाल बंद कर दिए गए हैं। यातायात के साधन भी बंद हैं। इसका सम्मित असर वायु प्रदूषण पर पड़ा है।

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