अण्णा हजारे ने की शराब की दुकानें खोलने के फैसले की आलोचना

पुणे। एन पी न्यूज 24 – लॉक डाउन के तीसरे चरण की घोषणा के साथ सरकार ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिहाज से कई सहूलियतें दी हैं। इसमें ग्रीन, ऑरेंज ज़ोन में शराब की दुकानें शुरू करने का फैसला भी शामिल है। हालांकि इस फैसले की हर स्तर से निंदा की जा रही है। वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे ने लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र में शराब की दुकानों को दोबारा खोलने की अनुमति दिए जाने को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की और फैसले को ‘असंवेदनशील और अनुचित’ करार दिया।
उन्होंने इस बारे में मीडिया को जारी किए बयान में कहा कि संकट के इस समय में कोरोना वायरस को काबू करना और जिंदगियों को बचाना शराब बेचकर राजस्व कमाने से ज्यादा जरूरी था। लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रवेश करने के बाद सोमवार से राज्य के कुछ हिस्सों में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई थी। इस पर नाराजगी जताते हुए हजारे ने कहा, दिन प्रतिदिन, देश में कोविड-19 का संक्रमण बढ़ता जा रहा है और दुर्भाग्य से महाराष्ट्र इस सूची में शीर्ष पर है। देखने में आया है कि लॉकडाउन लागू होने के चलते कुछ हद तक वायरस के प्रसार को काबू करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि लोगों को केवल जरूरी सामान लेने के अलावा बाहर निकलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने शराब की दुकानें खोले जाने की अनुमति दे दी, जिसके बाद इन दुकानों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। हजारे ने कहा कि शराब खरीदने की लाइन में लगे लोग सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करते दिखाई दिए और इन्होंने मास्क भी नहीं पहने हुए थे। यह कोरोना के खतरे को बढाने में सहायक साबित होगा। इस विपदा की घड़ी में लोगों की जान बचाना ज्यादा जरूरी है न कि शराब बिक्री की अनुमति देकर राजस्व कमाना।
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