लॉकडाउन खत्म, ‘वुहान’ में रुके भारतीयों ने बताया कैसे निपट सकते है ‘कोरोना’ से, कहा- ‘भारत’ को इससे ज्यादा ‘खतरा’

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वुहान : एन पी न्यूज 24 – जहां से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी आज वह शहर वह देश खड़ा होकर फिर से चलने लगा है। वहां 2 महीने से अधिक लॉकडाउन रहा। लोग घरों में कैद रहे। सबने लॉकडाउन का साथ दिया और देखिये आज लोग हंस-खेल कर वुहान शहर में फिर से घूमने लगे है। कुछ महीना पहले याद कीजिये यहां कोरोना किस तरह हावी था। सड़के सुनसान पड़ी हुई थी। हर दिन सैकड़ों मौतें हो रही थी। लेकिन लोगों ने कोरोना के संकट को ध्यान में रखते हुए घरों में रहने का फैसला किया। लोगों ने लॉकडाउन को माना और कोरोना से जंग जीत गए।

ऐसे ही आज हमे लॉकडाउन की जरुरत है। भारत में भी लोग घरों में रहे लॉकडाउन को मानें। तभी हम कोरोना के चैन को रोक पाएंगे। तभी हम कोरोना को हरा पाएंगे। वरना कोरोना को हराना बहुत मुश्किल हो जायेगा। अमेरिका, स्पेन ने इससे हलके में लिए फिर देखिए वहां देखते ही देखते मौत का तांडव शुरू हो गया। हर दिन हजारों की संख्या में वहां मौत हो रही है।  आज हम बात कर रहे चीन के वुहान शहर की। जहां कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये लगाया गया 11 सप्ताह का बंद खत्म होने के बाद जश्न का माहौल है।

वुहान में रुके भारतीयों ने कहा इस तरह जीत सकते है कोरोना से –
इस महामारी के प्रकोप के दौरान शहर में ही रुके रहे कुछ भारतीयों ने भारत को संदेश दिया है कि कोविड-19 से बचने के लिये सख्त लॉकडाउन और भौतिक दूरी ही एकमात्र रास्ता है।  वुहान में हाईड्रोबायोलॉजिस्ट के तौर पर काम कर रहे अरुणजीत टी सार्थजीत ने कहा है कि ‘मैं 73 दिन से भी ज्यादा समय तक अपने कमरे में ही रहा। अनुमति लेकर ही मैं अपनी प्रयोगशाला पर जा रहा था। माइक्रोबायोलॉजिस्ट से हाईड्रोबायोलॉजिस्ट बने अरुणजीत वुहान में एक शोध परियोजना का हिस्सा हैं।

इससे भारत को ज्यादा खतरा –
अरुणजीत ने कहा कि भारत ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू करके अच्छा किया लेकिन देश को मॉनसून के दौरान बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उस दौरान लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। अरुणजीत ने कहा कि उस दौरान वायरस घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर वुहान से कोई सबक लिया जा सकता है तो वह कड़ा लॉकडाउन और भौतिक दूरी बनाए रखना है।

एक दूसरे भारतीय ने कहा –
एक दूसरे भारतीय ने कहा कि ‘मैंने 72 दिनों तक खुद को अपने घर में कैद रखा। मेरे पड़ोसी के तीन बहुत छोटे बच्चे हैं। मैंने उन्हें एक बार भी उनके फ्लैट से बाहर आते नहीं देखा। उन्होंने भारतीयों को लॉकडाउन का पालन करने की सलाह दी।

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