‘मोदी के दीपक’ से होगा नया उजाला, 10 दिन से घरों मैं कैद लोगों में आएगी नई ऊर्जा

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नई दिल्ली, एन पी न्यूज 24 – प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को देशवासियों की हौसला अफजाई करते हुए कहा है कि इस कठिन घड़ी में आने वाले रविवार को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घर की लाइटें बंद करके दीये और टॉर्च की रोशनी जलाएं। उनके इस बयान पर कई बचकानी प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन किसी ने इसकी गंभीरता का अंदाजा नहीं लगाया।

दरअसल, इसके पीछे निहीतार्थ है। पिछले 10 दिनों से  लोग अपने घरों में कैद हैं। प्रधानमंत्री के इस मूलमंत्र में कई तरह के सकारात्मक मनोवैज्ञानिक पहलू छिपे हैं।  देश के मनोविश्लेषकों का कहना है कि मोदी जी की अपील मोटिवेशनल टूल है, जो इस मुश्किल वक्त में देश के हर नागरिक के लिए जरूरी है। जो लोग कोरोना से पीड़ित हैं, उनके लिए भी और जो इस बीमारी के फैलाव से डर रहे हैं, उनके लिए भी। दरअसल, घर की लाइटें बंद करके दीए जलाएंगे तो आपको अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की प्रेरणा मिलेगी। लोगों को लगेगा अंधकार चाहे कितना भी घना क्यों न हो, प्रकाश से निकली ऊर्जा उसका अंत अवश्य करेगी। इस मुश्किल दौर में प्रधानमंत्री ने जिस तरह जनता से एक कमांडों की तरह हौसला अफजाई की है, उससे सकारात्मक रोशनी फैलेगी। वैसे भी डिप्रेशन का इलाज दवा नहीं, बल्कि हौसला अफजाई और एकजुटता ही है।

हम साथ-साथ : दरअसल, कोरोना के बढ़ते मामलों और लंबे लॉकडाउन से लोगों में डर आ गया है। तनाव और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। इस तनाव और अनिश्चितता से बचने के लिए सबका एकजुट होना सकारात्मकता पैदा करेगी। पूरा देश एक साथ मिलकर लाइट बंद करेगा और अपने घरों को दीयों और टॉर्च के साथ रोशनी जलाएगा तो लॉकडाउन की वजह से जो लोगों में जो अलगाव आ गया है, उससे छुटकारा मिलेगा। लोगों को लगेगा कि हम अलग-अलग नहीं, बल्कि साथ-साथ हैं।

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