1 गेंद पर 21 रन का टारगेट…   नहीं रहे टोनी लुईस, ऐसे आया था डकवर्थ लुईस नियम, जानें पूरी कहानी

नई दिल्ली : एन पी न्यूज 24 – एक बार 1992 के वर्ल्ड कप के दौरान साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच मैच खेला जा रहा था। मैच के बीच में बारिश ने कई बार खलल डाली। जिसके बाद एक ऐसा मोड़ आया जिससे हर कोई हैरान रह गया। परिस्थिति के हिसाब से  साउथ अफ्रीका को 1 गेंद पर 21 रनों का असंभव टारगेट मिला था। इस आखिरी गेंद पर एक रन बना और अफ्रीका 19 रनों से हारकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वर्ल्ड कप से बाहर हो गई। इस परिणाम से हर कोई दुखी था। हर तरफ नतीजे का मजाक उड़ा। जिसके बाद ही आईसीसी ने डकवर्थ-लुईस सिस्टम तैयार किया।

डकवर्थ-लुईस-स्टर्न विधि तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले टोनी लुईस अब नहीं रहे। इस विधि को आईसीसी ने 1999 में अपनाया था। यह फॉर्मूला सिडनी में 1992 के विश्व के दौरान बारिश से प्रभावित सेमीफाइनल के जवाब में आया था। सेमीफाइनल का ये मैच सिडनी में साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच हुआ था। तब ‘लोवेस्ट-स्कोरिंग-ओवर’ रेन नियम लागू था। यानि कि बारिश की वजह से मैच की दूसरी पारी के बाधित होने पर लक्ष्य में कटौती पहले बल्लेबाजी करने वाले टीम के सबसे कम स्कोरिंग ओवरों के अनुपात में।

मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी की। बारिश की वजह से मैच 45 ओवरों का हो गया था। ग्रीम हिक की 90 गेंदों पर 83 रनों की पारी की बदौलत इंग्लैंड का स्कोर 45 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 252 रन तक पहुंचा। टीम को जीत के लिए 13 गेंदों पर 22 रन चाहिए थे। तभी एक बार फिर जोरदार बारिश आ गई। बारिश रुकी तो दक्षिण अफ्रीका को 1 गेंद पर 21 रनों का असंभव टारगेट मिला था। जिसके बाद आईसीसी ने डकवर्थ-लुईस सिस्टम तैयार किया। हालांकि आज भी डकवर्थ-लुईस सिस्टम कई लोगों के ऊपर से चला जाता है। यानि बहुत किसी को आज तक इस नियम का पता नहीं है।

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