मंच तैयार है….महामारी थमने के बाद अब महाशक्ति होगा यह देश

-दो महाशक्तियों के बीच की लड़ाई का नतीजा कोरोना

नई दिल्ली. एन पी न्यूज 24 – कोरोना सोची-समझी साजिश या महामारी…। इसे लेकर मंथन जारी है। हालांकि यह दूसरी बात है कि पूरी दुया अभी मात्र इस महामारी से निपटने के बारे में ही सोच रही है। अगर पार्श्व में जाएं तो चीन में आज जो भी विकास दिख रहा है उसमें अमेरिका की बड़ी भूमिका है, लेकिन अब चीन, अमेरिका की आंखों में खटकने लगा है। कोरोना वायरस से चीन उबरता हुआ दिख रहा है, जबकि अमेरिका बुरी तरह प्रभावित होता जा रहा है। पहले लगा था कि चीन की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी, लेकिन चीन ने अपने आप को संभाल लिया है। वायरस का प्रभाव सोवियत युग वाले साम्यवादी ब्लॉक पर भी बहुत ज्यादा असर नहीं डाल पाया है। चीन के दोस्त इटली और ईरान में इस वायरस का प्रभाव व्यापक पड़ा है, लेकिन चीनी सहायता वहां भी पहुंचने लगी है। इसके साथ ही साथ क्यूबा ने भी अपने डॉक्टरों के दल को इन दानों देशों में भेजा है। इससे यह साबित हो रहा है कि कोरोना वायरस के पीछे का रहस्य जो बताया जा रहा है वह नहीं है, कुछ और है।

चीन से टक्कर : कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना प्राकृतिक नहीं यह दुनिया के दो महाशक्तियों के बीच की लड़ाई का नतीजा है।  अमेरिकी रणनीतिकारों को यह लगने लगा है कि चीन उसे टक्कर दे सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान दौर का सबसे ताकतवर देश संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) है। उसके पास दुनिया की अर्थव्यवस्था की कुंजी है। उसके पास दुनिया को मिनटों में तबाह करने वाले अत्याधुनिक हथियार हैं। उसके पास अपार खनिज संपदा है और अन्न के भंडार भरे हैं।  सबसे बड़ी बात यह है कि वर्तमान दुनिया को चलाने वाले फ्यूल यानी प्राकृतिक तेल और गैस का सबसे बड़ा भंडार अमेरिका के पास है।

चीन का प्रभाव बढेगा : जिस प्रकार चीन कोरोना आपदा से निपटने के लिए विश्व के देशों को आगे बढ़कर सहयोग कर रहा है, उससे लगता है कि कोरोना आपदा से उबरने के बाद विश्व पर चीन का प्रभाव बढ़ेगा। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्था को चीन और रूस मिलकर अपने प्रभाव में ले सकता है क्योंकि अमेरिका ने हाल के दिनों में इन दोनों संगठनों की जबरदस्त तरीके से अव्हेलना की है। इसलिए ये दोनों संगठन चीन को सहयोग कर सकते हैं।
मंच तैयार है : चीन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिल कर ब्रिक्स यानी (भारत, ब्राजील, रूस, चीन एवं दक्षिण अफ्रिका) नामक वैश्विक आर्थिक मंच बनाया है। इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों की अभी हाल ही में हुई बैठक में यह तय हो गया है कि इन देशों के बीच जो भी व्यापार होगा वह आपस करेंसी में ही होगा। अमेरिका इसे भी चुनौती के रूप में देख रहा है।

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