निर्भया केस : चारों दोषियों की ऐसे कटी आखिरी रात, शाम के खाने से लेकर फांसी से पहले नहाने तक, जाने वो सब कुछ  

नई दिल्ली : एन पी न्यूज 24 – आखिकार 7 साल बाद निर्भया के चारों गुन्हेगारों को आज फांसी दे दी गयी। कोर्ट के आदेश अनुसार यह फांसी सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में दिया गया। पवन, मुकेश, अक्षय और विनय इन चारों की आखिरी रात बहुत ही बेचैनी से कटी। जानकारी के मुताबिक, चारों पूरी रात अपने बैरक में टहलते दिखे। थोड़ी देर बैठे, फिर खड़े होते, फिर अचानक चलने लगते। सबके चेहरे से रंग उड़ गया था, हो भी क्यों न जिसको पता वो कुछ ही घंटों में मरने वाला है। तिहाड़ जेल सूत्र के मुताबिक, आखिर रात को चारों दोषियों को सामान्य खाना दिया गया। हालांकि मुकेश और विनय ने खाना नहीं खाया। बाकि दोनों दोषियों ने खाना खाया। लेकिन बहुत कम

दोषियों ने फांसी से पहले खाने की आखिरी थाली –
जेल के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, चारों दोषियों को जेल मैनुअल के मुताबिक रात का खाना दिया गया। एक सब्ज़ी, एक दाल और छह चपाती उनके सामने रखी थी। उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वे थाली की तरफ हाथ बढ़ायें। उसके बाद जेल कर्मी के आग्रह पर उन्होंने थाली पकड़ ली। इसके बाद थाली को दीवार की ओर खिसका दिया। करीब एक घंटे बाद उन्होंने थोड़ा बहुत खाना खाया। दूसरी तरफ अक्षय और पवन ने आराम से थाली पकड़ ली। उन्होंने भी काफी देर तक कुछ नहीं खाया, लेकिन बाद में वे रोटी और दाल खाकर दीवार के साथ कमर लगा कर बैठ गए।

ऐसी होती है आखिरी रात –
रात के खाने के बाद और फांसी के पहले करीब 7-8 घंटे का वक़्त होता है। इस दौरान जेल मेन्युल के मुताबिक, हर दो-दो घंटों में डॉक्टरों की टीम दोषियों का चेकअप करते है। वो उनसे बात करते है। उन काल कोठरी में गार्ड की संख्या बढ़ा दी जाती है। फिर तड़के 4 बजे सभी दोषियों को उठाया जाता है। हालांकि नाम का उठाया जाता है क्योंकि फांसी के डर से वह रात भर सो ही नहीं पाते है। 4 बजे उठाकर दोषियों को नाश्ता दी जाती है। इस बीच उनसे आखिरी इच्छा भी पूछ ली जाती है। अगर दोषी कुछ खाना चाहते हो और वो मुमकिन हो तो उससे वो दे दिया जाता है। फिर उन्हें नहलाया जाता है। हालांकि अगर कोई न नहाना चाहिए तो उसकी बात मान ली जाती है। इसके बाद दोषियों को हर हाल में काला कपड़ा पहनाया जाता है।

ऐसे इसलिए क्योंकि कही बार फांसी के दौरान यूरिन और टॉयलेट भी पास हो जाता है और जेल के नार्मल सफ़ेद कपड़ों में वह साफ़-साफ़ दिखता है इसलिए दोषियों को फांसी से पहले काला कपड़ा पहनाया जाता है। तिहाड़ सूत्र के मुताबिक, दोषियों को बैरेक से निकालते वक़्त ही काले कपड़े से उनका सर को ढक दिया जाता है। जिससे आसपास का माहौल देखकर वो अजीब बर्ताव न करने लगे। जब वह फांसी के तख्ते पर पहुँचता है तब उनके पैर को भी बंद दिया जाता है वही हाथ पहले से पीछे बंधे रहते है। आखिर में जल्हाद के लीवर खींचने के 8-15 मिनट बाद डॉक्टर दोषियों की जांच करते है और डेथ सर्टिफिकेट देते है।

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