अब आसमान से भी खतरा… 31 हज़ार किमी./घंटा की रफ्तार से घरती की ओर बढ़ रहा है उल्कापिंड, टकराया तो सब कुछ खत्म हो जाएगा

नई दिल्ली. एन पी न्यूज 24 – बड़ी महामारी बनकर उभरी कोरोना वायरस से भी पूरा विश्व सहमा हुआ है और इसी बीच पृथ्वी पर अंतरिक्ष से तबाही का सैलाब आने वाला है। नासा के अनुसार, अप्रैल में अंतरिक्ष से एक एस्टोराइड यानी उल्कापिंड धरती से टकरा सकता है। इसकी रफ़्तार 31 हज़ार किमी./घंटा है। इसका नाम एस्ट्रोयड 52768 या 1998 ओआर 2 है। इसे हाल ही में इटली में स्थापित वर्चुयल टेलिस्कोप प्रोजेक्ट के तहत देखा गया है। यह उल्कापिंड आकार में चार किलोमीटर के व्यास का है। यानी यह आकार में माउंट एवरेस्ट के जितना बड़ा है। इसलिए इसे पृथ्वी के लिहाज से खतरा माना जाता है। स्पष्ट है कि इतने बड़े आकार का उल्कापिंड जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा तो आग का गोला बन जाने के बाद भी उसका ढेर सारा हिस्सा जलता हुआ ही पृथ्वी से आ टकरायेगा। नासा की गणना के मुताबिक इस बड़े उल्कापिंड के पृथ्वी के करीब आने की अनुमानित तिथि 29 अप्रैल है।

बदल जाएगी धरती की तस्वीर : घोषित तौर पर तो अभी कोई खतरा नहीं है। किसी बड़े आकार के उल्कापिंड का कभी भी पृथ्वी पर आ टकराने की संभावना हमेशा बनी रहती है। उनके मुताबिक अगर कोई बड़े आकार का उल्कापिंड वाकई पृथ्वी पर आ गिरा तो यह तय है कि पृथ्वी की बहुत बड़ी आबादी एक ही झटके में समाप्त हो जाएगी। जिस इलाके में यह गिरेगा वहां का जीवन की नष्ट हो जाएगा और हो सकता है कि पूरी पृथ्वी की भौगोलिक संरचना फिर से बदल जाए।

अभी धरती से 36 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर है : यह पृथ्वी से अभी करीब 36 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर है। इसका आकार ही चिंता बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। आम तौर पर जब छोटे आकार के उल्कापिंड पृथ्वी पर आ गिरते हैं तो वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण की वजह से उनका अधिकांश भाग जलकर राख हो जाता है।

तब डायनासोर की प्रजाति ही खत्म हो गई थी : इस उल्कापिंड के टकराने से भूकंप और सूनामी का आना तय है। साथ ही पृथ्वी के अंदर अचानक के दबाव बढ़ने की वजह से कई ज्वालामुखी भी अचानक से सक्रिय हो जाएंगे। इससे पहले एक दस किलोमीटर व्यास का उल्कापिंड जब पृथ्वी पर आ गिरा था तो पृथ्वी पर उस वक्त राज करने वाली डायनासोर की प्रजाति एक झटके में समाप्त हो गयी थी।

आशंका है कि दूर से गुजर जाएगा : इस उल्कापिंड के बारे में अनुमान है कि यह पृथ्वी से करीब सवा छह लाख किलोमीटर की दूरी से गुजर जाएगी। अंतरिक्ष के लिहाज से यह काफी कम दूरी है। अप्रैल में इसके पृथ्वी से टकराने की कोई आशंका नहीं है। एक बार गुजर जाने के बाद वह अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा। वैसे अंतरिक्ष में छोटे बड़े आकार के अनेक ऐसे उल्कापिंड मंडरा रहे हैं, जिनका कोई स्थिर ठिकाना नहीं है। ऐसे आवारा किस्म के उल्कापिंडों से ही पृथ्वी को ज्यादा खतरा है, क्योंकि वे कभी भी किसी भी गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर अपना रास्ता और चाल बदल लिया करते हैं।

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