गोमूत्र के बाद ‘पवित्र तेल’ से कोरोना के इलाज का दावा

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने की शिकायत

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पुणे। .एन पी न्यूज 24  – दुनियाभर में हाहाकार मचा रहे कोरोना वायरस से बचने और इलाज के उपाय तलाशे जा रहे हैं। हालांकि, इस बीच वायरस से राहत दिलाने के कई अजीबोगरीब दावे किये जा रहे हैं। हाल ही में कोरोना से राहत दिलाने के नाम पर गोमूत्र पार्टी का आयोजन किया गया था। गत सप्ताह नई दिल्ली में खुद गोमूत्र पीकर इसे सच साबित करने की कोशिश भी की। इसके बाद पुणे में भी ऐसा एक दावा किया गया। पुणे से सटे पिंपरी चिंचवड़ शहर के एक पादरी ने एक ‘पवित्र’ तेल के साथ ‘ब्लड ऑफ जीसस’ का 100 बार मंत्रोच्चार करने से वायरस दूर होने का दावा किया है।
दापोड़ी स्थित विनयार्ड वर्कर्स चर्च के पादरी पीटर सिलवे के इन दावों का महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने कड़ा विरोध करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। समिति के राज्य प्रधान सचिव मिलिंद देशमुख और पुणे जिला कार्याध्यक्ष नंदिनी जाधव ने पादरी के इस दावे को लेकर नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही दापोड़ी में कई जगहों पर लगे इसके प्रचार के पोस्टर्स को लेकर भी आपत्ति जताई गई। पादरी ने सोशल मीडिया के जरिए भी इसका प्रचार प्रसार किया है। अब प्रचार के ये विडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे हैं।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने इस मामले की जानकारी जिला प्रशासन को दी है। समिति ने मांग की कि समुदाय विशेष के नेता पर कार्रवाई की जाए क्योंकि उनकी इस हरकत से महामारी के बीच में कोई और दिक्कत भी खड़ी हो सकती है। समिति ने सिलवे के 25 मिनट के विडियो को सबूत के तौर पर रखा है, जिसमें पादरी ने कोरोना वायरस से बचने के लिए आध्यात्मिक तरीका बताया है। हैरान वाली बात तो यह है कि कोरोना की कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है लेकिन ऐसे में इस तरह के प्रयोग दिक्कतों में इजाफा कर सकते हैं। यहां, पादरी ने खास तौर पर ‘पवित्र’ तेल और ‘ब्लड ऑफ जीसस’ का उल्लेख किया है।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के महाराष्ट्र राज्य प्रधान सचिव मिलिंद देशमुख और जिला कार्याध्यक्ष नंदिनी जाधव कहते हैं, ‘यह भगवान के नाम पर पाखंड है। यदि कोई संक्रमित शख्स इन विकल्पों पर यकीन कर लेता है तो सोचकर देखिए कि उसका क्या होगा। इन सब बातों पर विश्वास करने वाला संक्रमित व्यक्ति तो इलाज और आइसोलेशन से दूर हो जाएगा? इन फर्जी दावों की वजह से और बड़ी दिक्कत हो सकती है।’ बहरहाल अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की शिकायत पर अब जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है? यह देखना दिलचस्प होगा।
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